त्रिपुण्ड : एक महायज्ञ
मनुष्य की सबसे बड़ी शक्ति ज्ञान नहीं, बल्कि उसकी स्वतंत्र और उत्तरदायी चेतना है।
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मनुष्य की सबसे बड़ी शक्ति ज्ञान नहीं, बल्कि उसकी स्वतंत्र और उत्तरदायी चेतना है।
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शब्द कभी सिर्फ शब्द नहीं होते—वे समय की परछाइ होते हैं, समाज का आईना होते हैं, और कभी-कभी एक ऐसे सच की गवाही भी...
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1945 में स्थापित संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) आज भी वैश्विक शांति एवं सुरक्षा का सर्वोच्च संस्थागत मंच है। किंतु इसकी संरचना द्वितीय विश्वयुद्ध...
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मनुष्य की सबसे बड़ी शक्ति ज्ञान नहीं, बल्कि उसकी स्वतंत्र और उत्तरदायी चेतना है।
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उसके मन में एक अजीब-सी बेचैनी थी, एक अनकहा आकर्षण, जिसे उसने पहले कभी महसूस नहीं किया था।
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शब्द कभी सिर्फ शब्द नहीं होते—वे समय की परछाइ होते हैं, समाज का आईना होते हैं, और कभी-कभी एक ऐसे सच की...
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“युद्ध तब समाप्त नहीं होता जब अंतिम गोली चलती है; वह तब समाप्त होता है जब मनुष्य प्रतिशोध से अधिक विश्वास को...
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"चेतना का धर्म स्वतंत्र होना है, और स्वतंत्रता का धर्म उत्तरदायी होना।"
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1945 में स्थापित संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) आज भी वैश्विक शांति एवं सुरक्षा का सर्वोच्च संस्थागत मंच है। किंतु इसकी संरचना...
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जिस व्यक्ति की दृष्टि धुंधली हो जाती है, वह सत्य को पहचानने में असमर्थ रहता है। उसकी हर बात में कहीं न...
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