🌟 मैं शिक्षक हूँ… एक अध्यापक।
ना मंच पर कोई सितारा,
ना अख़बारों की सुर्ख़ी,
मैं बस वो दीया हूँ,
जो हर सुबह बच्चों के लिए जलता है — चुपचाप।
📚 मैं सिखाता हूँ सिर्फ़ किताबें नहीं,
मैं सिखाता हूँ सपनों की ऊँचाई।
कभी गणित के सूत्रों में,
तो कभी ज़िंदगी के मूल्यों में।
⚖️ कभी डांटता हूँ…
तो सिर्फ़ इसलिए कि वो गलती दोहराएँ नहीं।
😊 कभी मुस्कराता हूँ…
तो इसलिए कि उनमें हौसला ज़िंदा रहे।
🖍️ मेरे हाथों में चॉक है,
पर हथियार नहीं…
मेरे पास हैं शब्द,
जो आत्मा को आकार देते हैं।
🌈 मैंने कई सपने…
अपनी आँखों से निकलकर
उनकी आँखों में जाते देखे हैं…
और वही है मेरा पुरस्कार।
🏆 मैं नायक नहीं,
पर हज़ारों नायकों को गढ़ता हूँ।
⛳ मैं भाग्य नहीं बदल सकता,
पर दिशा ज़रूर दे सकता हूँ।
🔥 मैं शिक्षक हूँ – एक अध्यापक।
मैं जलता हूँ,
पर बुझता नहीं।
क्योंकि मेरे जलने से
किसी और का भविष्य रोशन होता है।
🪔 शिक्षक को प्रणाम 🙏