यदि सूक्ष्मता से अध्ययन करें तो यह देखा जा सकता है कि हड़प्पा में सभ्यता और संस्कृति दोनों के लक्षण विभमान है थे। किसी सभ्यता को सभ्यता तब कहा जाता है जब उनमें नगर नियोजन, जटील समाज (अर्थात् समाज कई वर्गो में बटाँ हुआ), विज्ञान व प्रौधोगिकी, दूरस्थ व्यापार, कला व वास्तुकला के तत्व विद्यमान हो वहीं संस्कृति के लिए जीवन शैली, धार्मिक विश्वास, संस्कार, परम्पराएं त्या भौगोलिक विशिष्टता की मौजूदगी अनिवार्य तत्व हैं।
चूंकि हड़प्पा सभ्यता एकाएक नगरीय सभ्यता नहीं बनी, कई परिपक्व हड़प्पाई नगरों के उत्खनन से मिलें साख्य वहां आध हड़प्पाई संस्कृतियों जो कि ग्राम्य संस्कृति याँ भी को चिन्हित करती है। जैसा कि कालीबंगा, कापली राखीगढ़ी, भाम्री, मेह (गढ़, नाल, कुल्ली, धौलावीरा भादि से मिले साक्ष्य उन ग्राम्य संस्कृतियों को परि पक्त अवस्था में जाते हुए प्रदर्शित करती है अमें से धोलावीरा, कालीबंगा तथा बनावली तो परिपक्व हड़प्पा सभ्यता के प्रमुख नगर रहे। इस महत्वपूर्ण स्थलों की मौजूदगी भाघ हड़प्पा, परिपक्व हड़प्पा से लेकर अवनति काल तक रहीं, वहीं यदि हम धार्मिक विश्वासों का अध्ययन करें तो वहां मिली देवी की पृष्मूर्तियां तथा पशुपति व लिंग-योनि की प्रतीक चिन्हों ने इस आयाम की क्रमबद्धता को सही साबित कर देतें हैं।
मेहरगढ़ व कालीबंगा से मिले कृषि के प्रत्यीन साक्ष्य तथा रहमान देटी व मेहरगढ़ से मिले आद्य हडप्पाई दुर्गो की उपस्थिती सांस्कृतिक अनुक्रम को मान्यता देने के लिए उत्सुफ नजर आते है। वैसे भी हड़प्पा सभ्यता जो बलुचिस्तान के मकरान से उत्तर प्रदेश के आलमगीरपुर तक तथा जम्मू से नर्मदा घाटी तक विस्तृत भू-भाग पर भपनी आस्थिति को दर्शाती है जो कि एकाएक इतने बडे भू-भाग तक विस्तृत नहीं हो सकती बल्कि इसका फैलाव समय के साथ हुमा हो भधिक उचित प्रतीत होता है।
उदाहरण स्वरूप प्रमुख परिपक्व हड़प्पाई नगर मोहनजोदड़ो, हड़प्प्पा, लोथल थे वहीं आम्री, नाल, कुल्ली आदि प्रमुख भ्राम्य संस्कृतियों की पुष्टि करते हैं वहीं कालीबंगा, धोलावीरा, बनावली व राखीगढ़ी उसके अनुक्रम को सिद्ध करते हैं।
इस प्रकार हड़प्पाई अवस्थिति में सांस्कृतिक सरलता व नगरीय सभ्यता या जटील नगरीय समाज दोनो को महबूस किया जा सकता है लेकिन साक्ष्यों की उपलब्धता तथा अनुपलब्धता के आधार पर यह एक सभ्यता को अधिक महत्व देता है लेकिन इसे केपल विशुद्ध रूप से सभ्यता कहना उचित प्रतीत नहीं होता क्योंकि यहां संस्कृतियों का क्रमिक विकास की उपास्थिति रहीं हैं अर्थात हड़प्पा सभ्यता एक सांस्कृतिक अनुक्रम को मान्यता देती हुई प्रतीत होती है जहां सभ्यता का पक्ष मजबूत है।