.........बर्फली हवा तेज और तेज गर्जना के साथ उसके शरीर को चिर रही हो मानो कोई बाघ मांस चिर रहा हो, सूरज आग उगल रहा है और सामने त्रिपुण्डो की धरती…

एक तरफ़ उसकी शेरदिल त्रिपुण्डी सेना अपने माथे पर भस्म लगाए हुए – हाथियों की कतार, केसरिया ध्वज लहराते, नगाड़ों की गूंज, तलवारें चमकती हुईं आगे-आगे योद्धा, पीछे पैदल सेना, बीच में अपराजेय चतुरंगिनी सेना का अभेद्य मोर्चा। ........