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साहित्य

साहित्य निबंधों का यह संग्रह हिंदी साहित्य की विविधताओं, काव्य, उपन्यास, और नाटक के बारे में है। जानें कि साहित्य किस प्रकार समाज, संस्कृति और विचारधारा को प्रभावित करता है।

राज्य की संकल्पना के विपरित राष्ट्र को सामान्यतः एक अमूर्त इकाई माना गया है, जिसमें भावना का पक्ष प्रधान होता है। ऐसी विचारधारा जो लोगों को एकता के सुत्र में बांध सके, उनके बीच अपनत्व का भाव पैदा कर सके तथा साझा हितो की भावना स्थापित कर सके, जिसके आधार पर हम किसी भी विरोधी से टकराने को तैयार हो जाएं, ऐसी जागरूकता ही राष्ट्रवाद कहलाती है।

इतिहास

सामाजिक धार्मिक सुधार आन्दोलन की चेतना की गर्भ से राष्ट्रवादी प्रक्रिया को गति मिली और 1857 के महाविद्रो ने यह सिद्ध कर दिया की अधिकांश भारतीय जनता बिटिश सत्ता से असंतुष्ट है इसी क्रम में औपनिवेशिक सत्ता विरुद्ध भारतीय राष्ट्रवाद का क्रमशः विकास होता गया और उसी ने सांगठनीक प्रेरणा के रूप में भारतीय कांग्रेस की स्थापना को जन्म दिया।

इतिहास

MSP एक प्रकार से किसानों के लिए सामाजिक सुरक्षा के रूप में देखी जा सकती है।

भारतीय अर्थशास्त्र

MSP एक प्रकार से किसानों के लिए सामाजिक सुरक्षा के रूप में देखी जा सकती है।

भारतीय अर्थशास्त्र

हड़प्पाई नगर अपने विशिष्ट नगर- नियोजन प्रणाली

इतिहास

उसके मन में एक अजीब-सी बेचैनी थी, एक अनकहा आकर्षण, जिसे उसने पहले कभी महसूस नहीं किया था।

उपन्यास

उसकी शेरदिल त्रिपुण्डी सेना अपने माथे पर भस्म लगाए हुए।

उपन्यास

अंतरराष्ट्रीय कानून के अंतर्गत हर्मुज़ जलडमरूमध्य को एक “अंतर्राष्ट्रीय जलसड़क” माना जाता है। संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून सम्मेलन (UNCLOS) के अनुच्छेद 37 के तहत इसमें पारगमन पारगमन (transit passage) का अधिकार सभी जहाजों और विमानों को उपलब्ध है । इसका अर्थ है कि युद्धकाल में भी कोई देश अवरोध नहीं कर सकता; सभी जहाजों को बिना विलंब अपने सामान्य संचालन में जलडमरूमध्य पार करने का हक़ है।

International relation

शब्द कभी सिर्फ शब्द नहीं होते—वे समय की परछाइ होते हैं, समाज का आईना होते हैं, और कभी-कभी एक ऐसे सच की गवाही भी देते हैं जिसे देखने से हम बचते हैं। प्रस्तुत ग़ज़ल “काली स्याही” उसी सच की दस्तक है।

उर्दू शायरी

"चेतना का धर्म स्वतंत्र होना है, और स्वतंत्रता का धर्म उत्तरदायी होना।"

उपन्यास

1945 में स्थापित संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) आज भी वैश्विक शांति एवं सुरक्षा का सर्वोच्च संस्थागत मंच है। किंतु इसकी संरचना द्वितीय विश्वयुद्ध की शक्ति-संतुलन व्यवस्था पर आधारित है, जबकि 21वीं सदी की वास्तविकताएँ बदल चुकी हैं। इसलिए UNSC में सुधार और भारत की स्थायी सदस्यता की मांग अधिक प्रासंगिक हो गई है।

International relation

जिस व्यक्ति की दृष्टि धुंधली हो जाती है, वह सत्य को पहचानने में असमर्थ रहता है। उसकी हर बात में कहीं न कहीं छल छुपा होता है, चाहे वह कितना ही साधारण क्यों न लगे। ऐसे वातावरण में जो कुछ भी सच्चा और निर्मल है, वह भी कपटी हाथों में पड़कर अपना स्वरूप खो सकता है। अमृत जैसा पवित्र तत्व भी उनके स्पर्श से छल में परिवर्तित हो जाता है।

निबंध

फिर नज़रे झुकाकर धीरे से ये कहना, जब भी आए याद चलो फिर से मिलें

हिंदी कविताएँ